समय बदला. समय के साथ समाज बदला. समाज के महिलाओं की भूमिका में भी बदलाव आया. आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. लेकिन जहां वे अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं तो कहीं न कहीं उनके रिश्तों में भी दूरियां बढती जा रही हैं, चाहे वह पत्नी का हो, पुत्री का हो या फिर दोस्ती का. आज महिलाएं अपने कैरियर को लेकर बहुत ज्यादा ही सजग हैं लेकिन उनकी इस सजगता के कारण उनके आपसी रिश्तों में कहीं न कहीं खटास बढती जा रही है. वर्तमान समय में वे अपने कैरियर को पहले नम्बर पर रखती हैं तो पत्नी, पुत्री और दोस्ती के रिश्ते उनके लिये बेमानी होते हैं. इसका कारण है उनका स्वभाव से भावुक होना. यह गलत है. आप स्वयं के पैरों पर खड़ी हैं, अच्छी जगह काम करती हैं लेकिन आप अगर अपने कैरियर से संतुष्ट नहीं है और इसकी खीज अपने आस-पास के लोगों पर निकालती रहें तो यह आपके भविष्य के लिये ठीक नहीं होगा. माना कि आपको अभी सही मौका नहीं मिल रहा है और आप कैरियर को लेकर असंतुष्ट हैं तो इसका मतलब यह नहीं निकलता कि आप अपने घर-परिवार और दोस्तों से मुंह फेर लें. होना यह चाहिए कि आप अपनी असंतुष्टि और समस्याओं को दोस्तों के सामने रखें. दुनिया में दोस्ती ही वह अनमोल रिश्ता होता है जिसमें हम बेझिझक एक-दूसरे से मन की बातें कह लेते हैं. अपने कैरियर की असंतुष्टि को लेकर अकेले ही मन ही मन घुलते रहने से कोई फायदा नहीं होता. जल्दी मौका पाने के लिये आप किसी से कोई समझौता न करें. समझौता वह लोग करते हैं जिन्हें स्वयं पर विश्वास नहीं होता. अपने आप पर विश्वास रखें. परिवार और दोस्तों के साथ समान व्यवहार करें जैसा कि आप पहले किया करती थी. आज विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने जो अपना परचम लहराया है वह कैरियर और रिश्तों में संतुलन रखकर ही संभव हुआ है. चाहे वह पेप्सीको की इन्दिरा नूई हों या एचएसबीसी की नैनालाल किदवई या बीबीसी की चित्रा भरूच या फिर जर्मनी की चांसलर हैडन. हैडन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे आज भले ही जर्मनी की चांसलर हों लेकिन अपने पति को सुबह का नाश्ता कराना नहीं भूलतीं. आप भी आगे जाना चाहती हैं तो कैरियर और रिश्तों में संतुलन बनाएं रखें. तभी सफलता संभव होगी. अकेले दम कुछ नहीं होता.
Monday, December 10, 2007
कैरियर और रिश्तों में संतुलन
समय बदला. समय के साथ समाज बदला. समाज के महिलाओं की भूमिका में भी बदलाव आया. आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. लेकिन जहां वे अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं तो कहीं न कहीं उनके रिश्तों में भी दूरियां बढती जा रही हैं, चाहे वह पत्नी का हो, पुत्री का हो या फिर दोस्ती का. आज महिलाएं अपने कैरियर को लेकर बहुत ज्यादा ही सजग हैं लेकिन उनकी इस सजगता के कारण उनके आपसी रिश्तों में कहीं न कहीं खटास बढती जा रही है. वर्तमान समय में वे अपने कैरियर को पहले नम्बर पर रखती हैं तो पत्नी, पुत्री और दोस्ती के रिश्ते उनके लिये बेमानी होते हैं. इसका कारण है उनका स्वभाव से भावुक होना. यह गलत है. आप स्वयं के पैरों पर खड़ी हैं, अच्छी जगह काम करती हैं लेकिन आप अगर अपने कैरियर से संतुष्ट नहीं है और इसकी खीज अपने आस-पास के लोगों पर निकालती रहें तो यह आपके भविष्य के लिये ठीक नहीं होगा. माना कि आपको अभी सही मौका नहीं मिल रहा है और आप कैरियर को लेकर असंतुष्ट हैं तो इसका मतलब यह नहीं निकलता कि आप अपने घर-परिवार और दोस्तों से मुंह फेर लें. होना यह चाहिए कि आप अपनी असंतुष्टि और समस्याओं को दोस्तों के सामने रखें. दुनिया में दोस्ती ही वह अनमोल रिश्ता होता है जिसमें हम बेझिझक एक-दूसरे से मन की बातें कह लेते हैं. अपने कैरियर की असंतुष्टि को लेकर अकेले ही मन ही मन घुलते रहने से कोई फायदा नहीं होता. जल्दी मौका पाने के लिये आप किसी से कोई समझौता न करें. समझौता वह लोग करते हैं जिन्हें स्वयं पर विश्वास नहीं होता. अपने आप पर विश्वास रखें. परिवार और दोस्तों के साथ समान व्यवहार करें जैसा कि आप पहले किया करती थी. आज विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने जो अपना परचम लहराया है वह कैरियर और रिश्तों में संतुलन रखकर ही संभव हुआ है. चाहे वह पेप्सीको की इन्दिरा नूई हों या एचएसबीसी की नैनालाल किदवई या बीबीसी की चित्रा भरूच या फिर जर्मनी की चांसलर हैडन. हैडन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे आज भले ही जर्मनी की चांसलर हों लेकिन अपने पति को सुबह का नाश्ता कराना नहीं भूलतीं. आप भी आगे जाना चाहती हैं तो कैरियर और रिश्तों में संतुलन बनाएं रखें. तभी सफलता संभव होगी. अकेले दम कुछ नहीं होता.
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सृजन-सम्मान द्वारा आयोजित सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक ब्लॉग पुरस्कारों की घोषणा की रेटिंग लिस्ट में आपका ब्लाग देख कर खुशी हुई। बधाई स्वीकारें।
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